भारत में फ्लॉप रही इन 7 फिल्मो ने विदेशों में मचाया तहलका और जीते अवॉर्ड्स

By   Gagandeep
14 Aug 2019 @ 13:53

भारतीय सिनेमा पिछले 100 सालो से अधिक से दर्शकों को एंटरटेन करता आ रहा है। इन 100 सालों में दर्शकों को ड्रामा, एक्शन, लव स्टोरी और बायोपिक जैसे विषयों पर फिल्में देखने को मिलीं । हिंदी फिल्मों के दर्शक भारत में ही नहीं बल्कि देश-विदेश में फैले हुए हैं। इनमें से कुछ फिल्में तो ऐसी हैं जिन्हें भारत में भले ही उतनी सफलता ना मिली हो लेकिन इन्हें इंटरनेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया है

1937 में रिलीज हुई फिम संत तुकाराम’। फिल्म के डायरेक्टर विष्णु पंत धामले और शेख फट्टेलाल थे। यह पहली फिल्म थी जिसे ‘वेनिस फिल्म फेस्टिवल’ में स्पेशल प्राइज देकर नवाजा गया था।

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1946 में रिलीज हुई फिल्ममेकर चेतन आनंद की फिल्म ‘नीचा नगर’ को कांस फिल्म फेस्टिवल में Grand Prix du Festival International du Film अवॉर्ड से नवाजा गया था।

1951 में आई वी शांताराम की फिल्म ‘अमर भोपाली’ को Excellence in Sound Recording का अवॉर्ड मिला था।

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सत्यजीत रॉय की ‘पाथेर पांचाली’ फिल्म ने कई अवॉर्ड्स जीते थे। लेकिन 1956 में हुए कांस फिल्म फेस्टिवल में फिल्म को Palme d’Or for Best Human Document का अवॉर्ड मिला था।

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सत्यजीत रे की फिल्म ‘अपराजितो’ को गोल्डन लॉयन अवॉर्ड से नवाजा गया था। यह फिल्म 1957 में आई थी।

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1957 में आई बच्चों की फिल्म ‘जलदीप’ ने वेनिस इंटरनेशनल चिल्ड्रेन फिल्म फेस्टिवल में पहला पुरस्कार जीता था। इस फिल्म के डायरेक्टर किदार शर्मा थे।

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साल 2012 में आई डायरेक्टर राजन खोसा की फिल्म ‘गट्टू’ 62वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में special mention under Deutsches Kinderhilfswerk category का अवॉर्ड मिला था।

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